VIRTUAL LEARNING DURING PANDEMIC

(महामारी के दौरान आभासी ज्ञान-अर्जन)

शिक्षा अपने मूल में सामाजीकरण की एक प्रक्रिया है। जब-जब समाज का स्वरूप बदला, शिक्षा के स्वरूप में भी परिवर्तन की बात हुई। आज कोरोना संकट के दौर में ऑनलाइन शिक्षण के ज़रिये शिक्षा के स्वरूप में बदलाव आया है। पूरा विश्व कोविड-19 नामक एक अदृश्य विषाणु के प्रकोप से पीडित है। कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं बचा जो कोरोना महामारी से प्रभावित न हुआ हो। इस बीच संसार की सारी प्रगति, सारे विकास मानों रुक से गए थे।

24 मार्च को कोविड-19 रोकथाम के लिए जब देश भर में लॉकडाउन लागू किया गया तो उसके तुरंत बाद राज्यों की सरकारों ने स्कूली शिक्षा को ऑनलाइन करने का प्रावधान शुरू कर दिया। आमने-सामने की पढ़ाई से अचानक ऑनलाइन माध्यम में स्थानांतरित होने से शिक्षा प्रदान करने का स्वरूप बिल्कुल बदल गया। कल तक बैग व बस्ते के साथ विद्यालय जाने वाले बच्चे अब घर पर ही पूरी तन्मयता से पढ़ाई कर रहें हैं। कोरोना महामारी के समय ऑनलाइन शिक्षा एक ऐसी चुनौती के तौर पर सामने आया, जिसके लिए देश के अधिकांश शिक्षक पहले तैयार नहीं थे। कई ऐसे भी थे, जिनका जूम, गूगल मीट, एम. एस. टीम्स जैसे सॉफ्टवेयर से दूर-दूर तक नाता नहीं था। विद्यार्थियों के भविष्य के लिए शिक्षकों ने इस चुनौती को भी स्वीकार किया और नई तकनीक से जुड़ने के लिए कड़ी मेहनत की। नतीजा यह रहा कि जो शिक्षक कंप्यूटर व लैपटॉप चलाने से डरते थे, आज वह इतने प्रशिक्षित हो गए हैं कि ऑनलाइन माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं।  आज स्कूल के सभी शिक्षक ऑनलाइन शिक्षण में उत्तम प्रदर्शन कर रहे हैं। शिक्षकों द्वारा अप्रैल से बच्चों को ऑनलाइन कक्षा से जोड़ने व उनके शिक्षण को नियमित रखने के लिए हमारे स्कूल प्रबंधन, प्रधानाचार्या एवं अन्य प्रभारियों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। हमारे स्कूल के आईटी विभाग ने शिक्षकों और विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया। शिक्षकों ने पहले खुद सीखा और फिर ऑनलाइन शिक्षा से विद्यार्थियों को जोड़ा। हालाँकि, तकनीक को समझना और हर दिन उनका उपयोग करना शुरूआत में थोड़ा मुश्किल ज़रूर लगा लेकिन चीजें धीरे-धीरे मन-मस्तिष्क में बस गईं और शिक्षक नए तरीके के लिए अभ्यस्त हो गए। समय-समय पर वेबिनार, विभिन्न कार्यक्रम एवं प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जा रही हैं। हमें यह पता ही न था कि इतनी जल्दी हम सौ प्रतिशत वर्चुअल लर्निंग में बदल जाएँगे और पूरा स्कूल एक वर्चुअल स्कूल बन जाएगा। आज विद्यार्थियों को समय पर वर्कशीट, पी.पी.टी व नोट्स पहुँचाना, वर्कशीट के साथ अपना ऑडियो-वीडियो भेजना व ऑनलाइन कक्षा में वर्कशीट को समझाने आदि सभी कार्यों में शिक्षक बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। ब्लैकबोर्ड ने व्हाइटबोर्ड, जामबोर्ड और प्रोजेक्टर, नोटबुक को टैबलेट के लिए रास्ता दिया। हालाँकि, कोविड -19 महामारी ने पूरी कक्षाओं को ऑनलाइन शिफ्ट करके सीखने में एक बदलाव लाया। आज घर बैठे ही विद्यार्थी आभासी परीक्षाएँ भी दे रहे हैं। साथ ही शिक्षकों द्वारा परीक्षा-पत्रों की जाँच भी ऑनलाईन ही हो रही है जो बहुत सराहनीय है। इस तरह पारंपरिक कक्षाओं को नवीनतम तकनीकों के माध्यम से एक आभासी कक्षा में बदल दिया गया है और पारंपरिक शिक्षक एक आभासी शिक्षक बन गए हैं।

ऑनलाइन शिक्षण का एक और सकारात्मक प्रभाव यह रहा कि छात्र एवं शिक्षक अधिक तकनीक-प्रेमी बन गए हैं। उन्हें विभिन्न एप्लिकेशन और कार्यक्रमों के बारे में अधिक जानकारी मिल रही है। कोरोना

महामारी ने वर्चुअल स्पेस में शिक्षा, शिक्षण और शिक्षण संस्थाओं को नए ढ़ंग के अभ्यास करने को प्रेरित किया और बदलने को बाध्य भी किया है। परिणामतः ऑनलाइन शिक्षण ने क्लासरूम टीचिंग के अर्थ, अवधारणा और आह्वान के उददेश्यों व लक्ष्यों को ही बदलकर रख दिया है।

बीना दिलीप

(हिंदी विभाग)

ACTIVITY BASED LEARNING

“What we learn with pleasure, we never forget.”

Education is not just about going to school and getting a degree. It’s about widening your knowledge and absorbing it with pleasure. Pleasure in gaining knowledge comes only when learning is made interactive. This can be possible when it is learned by doing activities practically, which brings out creativity. Creativity leads to thinking and thinking provides knowledge.

Activity-based learning (ABL) is the process of learning by doing. Firstly, ABL helps the children to learn how to take up the responsibility. They engage themselves to do activities that will help them to be more focused and increase their concentration level.

Secondly, while doing the activity, the children will explore and do more research work. ABL encourages the students to actively participate in their own learning experience through practical activities and independent investigations. They understand the real-life relevance of learning material to explore and solve real problems. It helps the students to be more confident and creative in expressing their knowledge through the act of doing as well as through the verbal presentation.

It is concluded that ABL – activity-based learning motivates the child to take up the responsibility. Instead of rote learning, they will be learning with understanding. It will enhance the retention of the knowledge gained. It makes the class more interactive and interesting with hands-on experience. This approach of teaching also helps in personality development, enhancement of social traits, and interpersonal management skills.

“Teaching can be remembered – Involvement makes you learn”

SPORTS AT MERIDIAN

Meridian aim at holistic development of the students. Meridian gives equal importance to academics and co-curricular activities. Apart from academic activities Meridian offers many co-curricular activities like art, music, dance, sports and games etc. which are the part of the curriculum. At Meridian activities are offered under two categories – Performing Activities and Sporting activities. At Meridian learning and participating in activities is a must for every student.

At Meridian sports are given much importance, here right from primary level to senior secondary level students are given coaching in various sports and games like Basketball, Cricket, Chess, Football, Skating, Table-Tennis, Taekwondo etc. For every sport/game there is a professional coach, under their guidance the students are trained during school hours and talented students are given special training in extended hours of the school (i.e. before or after the school hours). At Meridian participation in sports is given more importance then winning, which helps in encouraging 100% participation of the students. At Meridian various sports competition are conducted for students like Intramurals and Extramurals.

Students are encouraged to participate in various Inter house and inter school competitions. Meridian students represent the school in all major inter school competitions conducted by CBSE, SGFI etc. in sports and games. Meridian students have won many State level and National level competitions in various sports. Few of our students made a mark at International level too. To inculcate the Sporting culture in students, Meridian hosted many CBSE Cluster VII and National meets successfully. Meridian students not only won many competitions state and National level but also bagged the CBSE’s most prestigious Chacha Nehru Award- which is presented to the students perform exceptionally well in National competition. To conclude at Meridian we believe:

“The will to win is not nearly so important as the will to prepare to win”.